सोमवार, 12 जनवरी 2009

पशुपतिनाथ मंदिर विवाद

नेपाल में प्रधानमंत्री ‘प्रचंड’ ने पशुपतिनाथ मंदिर में भारतीय पुजारियों को पूजा करने की अनुमति भले ही दे दी हो, लेकिन यह विवाद खत्म होने की बजाए और बढ़ता दिख रहा है।

पशुपति क्षेत्र विकास न्यास (पीएडीटी) के सदस्य सचिव ने मंदिर में नियुक्त दक्षिण भारतीय भट्ट पुजारियों पर चढ़ौती के लाखों रुपए की हेर-फेर करने का आरोप लगाया है, वहीं भारतीय पुजारियों की नियुक्ति का समर्थन कर रहे मंदिर की देखभाल करने वाले राजभंडारियों ने आरोप लगाया है कि भारतीय पुजारियों को इस्तीफा देने के लिए बाध्य किया गया था।भारतीय पुजारियों को हटाए जाने और उनकी जगह नेपाली पुजारियों की नियुक्ति से नेपाली और भारतीय हिन्दू समाज में असंतोष उत्पन्न हो गया था।इस मुद्दे में पूर्व नरेश ज्ञानेन्द्र और नेपाली कांग्रेस के सख्त रुख और भारतीय नेताओं की कड़ी प्रतिक्रिया के कारण नेपाली प्रधानमंत्री को भारतीय पुजारियों की बहाली करनी पड़ी है।प्रचंड के नेतृत्व वाली नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने भारत पर उसके आंतरिक राजनीतिक एवं सांस्कृतिक हमलों में हस्तक्षेप का आरोप लगाया है।

पीएडीटी के सदस्य सचिव परमानंद शक्य ने आज यहां रिपोर्ट्स क्लब में पत्रकारों से बातचीत में कहा, “यह राष्ट्रीयता का सवाल है, इसलिये हम नेपाली पुजारियों की नियुक्ति करेंगे। भारतीय पुजारियों की नहीं”।उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हो रही थीं। चढ़ावे का कोई हिसाब किताब नहीं था। उन्होंने कहा कि न्यास का प्रमुख उद्देश्य मंदिर की व्यवस्थ को दुरस्त करना है।शाक्य के अनुसार मंदिर में प्रतिदिन लगभग 40 हजार रपए का चढ़ावा सामान्य दर्शनार्थियों से आता है, जबकि रुद्राभिषेक एवं अन्य विशेष पूजा से अलग दक्षिणा आती है। ये सारा धन कहां जाता है, इसका कोई हिसाब नहीं है। शाक्य ने यह भी बताया कि अब संरक्षक पुजारियों की भूमिका में काम कर रहे दक्षिण भारतीय पुजारियों ने चढ़ावे में से कोई भी हिस्सा लेने से मना कर दिया है तथा वेतन एवं भत्तों की मांग की है, जिसपर न्यास सहमत हो गया है। उधर, मंदिर के संरक्षक शिवशरण राजभंडारी ने कहा कि प्रशासन ने दक्षिण भारतीय पुजारियों को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया था।

उन्होंने कहा कि न्यास द्वारा नियुक्त नए कर्मचारी भारतीय पुजारियों के प्रति अत्यंत असहयोग पूर्ण रवैया अपना रहे थे। इस वजह से उनके सामने इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं बचा। राजभण्डारी ने मांग की पीएडीटी के मौजूदा कानून में संशोधन कर न्यास का संरक्षक देश के शासन प्रमुख यानि प्रधानमंत्री की बजाये राष्ट्र प्रमुख यानि राष्ट्र्रपति को बनाया जाए।उधर, नेकपा (माओवादी) की केन्द्रीय कार्यसमिति की बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर भारत और अमेरिका पर नेपाल की राष्ट्रीय स्वतंत्रता एवं रक्षा सहित प्रमुख आंतरिक मामलों में लगातार हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया।प्रस्ताव में कहा गया कि भारत अपनी विस्तारवादी नीतियों के कारण नेपाल के आर्थिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक मामलों में जबरदस्ती हस्तक्षेप कर रहा है।इसी तरह अमेरिका के राजदूत जगह-जगह माओवादियों के खिलाफ भाषण दे रहे हैं। माओवादियों ने भारत पर नेपाल के जलसंसाधनों पर एकाधिकार करने की कोशिशों का भी आरोप लगाया है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पशुपतिनाथ मंदिर विवाद आगे और बड़ा रूप ले सकता है।

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